जेपी सेनानी व पूर्व लोक अभियोजक (पीपी) विमल शुक्ला ने सांसद देवेश चंद्र ठाकुर पर राजनीतिक विद्वेष से प्रेरित कार्रवाई का आरोप लगाते हुए कहा कि उनके इशारे पर पहले पीपी पद से हटवाया गया और फिर बिना कारण बताए जदयू की सदस्यता से 6 वर्ष के लिए निष्कासित कर दिया गया। पत्रकारों को संबोधित करते हुए शुक्ला ने दावा किया कि निष्कासन के समय वे किसी राजनीतिक दल के सक्रिय सदस्य भी नहीं थे।
50 वर्षों से जेपी आंदोलन से जुड़े शुक्ला ने बताया कि पिछले 6 महीनों तक उन्होंने लोक अभियोजक के रूप में कार्य किया, लेकिन सांसद की दुर्भावना के कारण निशाना बनाए गए। उन्होंने सांसद पर भ्रष्टाचार, कमीशनखोरी, ट्रांसफर-पोस्टिंग में हस्तक्षेप, संसदीय फंड के दुरुपयोग और भूमाफियाओं से सांठगांठ के गंभीर आरोप लगाए। विशेष रूप से जिले में 2.67 करोड़ की सीसीटीवी योजना में अनियमितता का खुलासा करते हुए कहा कि 18,500 रुपये वाले कैमरे की निकासी 1.25 लाख की गई, जिसमें 40% कमीशन सांसद को और 35% जिला अधिकारियों की कमेटी को मिला।
डुमरा के वार्ड 46 सिमरा मेन रोड में डा राम सागर राय का जमीन हड़पने के लिए हर स्तर पर गलत प्रयास किया। यदि वे लोकल विश्वनाथपुर का रिश्तेदार नहीं होते तो अपने गुंडों से उनको भगा दिया होता। उन्होंने कहा कि इतना ही नहीं भिसा और पुपरी में भी कई गरीबों को भूमाफिया के गुंडों से उजाड़ने का काम किया। कहा कि सांसद के खिलाफ जो आवाज उठ रही है, उस आवाज को दबाने के लिए मेरे जैसे जेपी सेनानी को आंख दिखाने का काम कर रहे हैं।उन्होंने स्पष्ट किया कि वे भ्रष्टाचार के खिलाफ पहले भी लड़े हैं और आगे भी संघर्ष जारी रखेंगे।
लगाए गए प्रमुख आरोप:
- सीसीटीवी घोटाला: संसदीय फंड से 2.67 करोड़ की योजना में भारी कमीशनखोरी।
- जमीन हड़पने की साजिश: डुमरा वार्ड-46, भिसा, पुपरी में गरीबों की जमीन पर भूमाफिया कार्रवाई।
- चुनावी षड्यंत्र: विधानसभा चुनाव में NDA उम्मीदवारों के खिलाफ भीतरघात।
- जनता का विश्वास भंग: अल्प कार्यकाल में सांसद ने जनता को ठगा।
शुक्ला ने कहा कि सांसद उनकी और जेपी सेनानियों की आवाज दबाने में लगे हैं, लेकिन वे भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष जारी रखेंगे। सीतामढ़ी की जनता सांसद के खिलाफ उठ रही आवाज का समर्थन कर रही है।

