सरकारी स्कूलों में मध्याह्न भोजन योजना (एमडीएम) के तहत बच्चों को भोजन कराया जाता है। इस भोजन की गुणवत्ता कैसी होती है, यह किसी से छुपा नहीं है। सीतामढ़ी में प्रति माह दो-चार प्रधान शिक्षक एमडीएम में घोटाले के आरोप में पकड़े जाते है और जुर्माना भी वसूल किया जाता है। इसके बावजूद कुछ स्कूलों के प्रधान शिक्षक बच्चों के अधिकार छीनने से बाज नहीं आ रहे है। कुछ ऐसा ही एक मामला उजागर हुआ है। जांच में सामने आए तथ्य चौंकाने वाले हैं।
भोजन की ऐसी गुणवत्ता!
जिले के परिहार प्रखंड के माध्यमिक विद्यालय सिरसिया बाजार में एमडीएम के तहत बच्चों को गुणवत्तापूर्ण भोजन नहीं मिलता है। इस स्कूल में 100 बच्चों के लिए सब्जी बनाने में प्रतिदिन मात्र चार प्याज का उपयोग किया जाता है। इतने बच्चों की सब्जी के लिए 250 ग्राम सरसों के तेल का प्रतिदिन उपयोग होता है। ऐसे में स्कूल में दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता कैसी होगी, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। एमडीएम के प्रखंड साधनसेवी की जांच में इन बातों का खुलासा हुआ है। जांच के आधार प एमडीएम के डीपीओ मनीष कुमार ने स्कूल के प्रधान शिक्षक से स्पष्टीकरण मांगा है।
जांच के दौरान प्रधान शिक्षक अनुपस्थित
बताया गया है कि 30 जनवरी को जांच के दौरान प्रधान शिक्षक अनुपस्थित थे। शिक्षकों ने साधनसेवी को जानकारी दी कि प्रधान शिक्षक फल लाने के लिए गए हैं। बच्चों ने कहा कि भोजन गुणवत्तापूर्ण नहीं होती है। शुक्रवार को अंडा नहीं मिलता है। जांच में खुलासा हुआ कि वर्ग सात एवं आठ के बच्चे मध्यांतर में घर चले जाते है। वे विद्यालय में नहीं खाते हैं। मध्यांतर में स्कूल का गेट खोल दिया जाता है, जिससे आधे बच्चे खाना खाने के लिए घर चले जाते हैं।
प्रधान शिक्षक खुद दर्ज करते हैं बच्चों की उपस्थिति
शिक्षकों ने साधनसेवी को बताया, प्रधान शिक्षक खुद बच्चों की उपस्थिति बनाते हैं। रसोईया सह सहायक ने उन्हें जानकारी दी कि प्रतिदिन औसत सौ बच्चे भोजन करते हैं। इतने बच्चों के भोजन के लिए प्रधान शिक्षक द्वारा प्रतिदिन 250 ग्राम सरसों का तेल, चार पिसे हुए प्याज एवं अल्प मात्रा में मसाला उपलब्ध कराया जाता है। जांच में जनवरी में एमडीएम पंजी संधारित नहीं मिली। पिछले एक सप्ताह में कितने बच्चों ने भोजन किया, इसकी कोई जानकारी नहीं मिल सकी। जांच के दौरान तक बच्चों की उपस्थिति नहीं बनी थी। 29 जनवरी को 469 बच्चों की हाजिरी दर्ज मिली, जबकि अनुश्रवण के दिन एमडीएम में मात्र 76 बच्चे शामिल थे। भोजन के बाद कक्षाओं में 168 बच्चे मिले थे। डीपीओ ने जांच के लिए प्रधान शिक्षक को कागजातों के साथ तलब किया है।

