करीब ढाई दशक से सीतामढ़ी-निर्मली रेल लाइन परियोजना फाइलों में बंद थी उसके अब धरातल पर उतरने होने की उम्मीद फिर से जगी है। सीतामढ़ी-निर्मली रेलखंड परियोजना पांच जनवरी, 2008 में स्वीकृत हुई थी। इसके बाद रेलवे बोर्ड द्वारा 2019 में स्थगित कर दिया था। 29 सितंबर, 2025 को इसे डी फ्रिज किया गया।
अब इस परियोजना के लिए फाइनल लोकेशन सर्वे कराकर डीपीआर तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। पूर्व मध्य रेलवे (निर्माण संगठन) के महेंद्रुघाट, पटना कार्यालय से जारी पत्र के अनुसार, परियोजना के लिए फाइनल लोकेशन सर्वे कराकर डीपीआर तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। परियोजना समस्तीपुर रेल मंडल क्षेत्र अंतर्गत सीतामढ़ी-निर्मली 188.9 किलोमीटर की है।
डीपीआर और सर्वे प्रक्रिया पूरी होते ही यह परियोजना वास्तविक निर्माण की ओर बढ़ेगी। अगर सब कुछ योजना के मुताबिक चला, तो आने वाले वर्षों में यह रेल लाइन बिहार के उत्तर-पूर्वी हिस्से की तस्वीर बदलने में अहम भूमिका निभा सकती है। इस रेलखंड के निर्माण से लाखों यात्रियों की यात्रा काफी आसान हो सकती है।
समस्तीपुर रेल मंडल क्षेत्र अंतर्गत यह रेलखंड सीतामढ़ी, बथनाहा, परिहार, सोनबरसा होते हुए सुरसंड, जयनगर, निर्मली तक जाएगी। इस रेलखंड का डीपीआर तैयार होने के बाद आगे की निर्माण प्रक्रिया का रास्ता साफ होगा।
नया टेंडर भी आमंत्रित कर दिया गया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि रेलवे इस बार परियोजना को लेकर गंभीर है। बिहार सरकार के ऊर्जा, योजना एवं विकास मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव के साथ हुई बातचीत में भी इस परियोजना को आगे बढ़ाने की पुष्टि की गई है।
यहां से होकर गुजरेगी रेल लाइन:
जानकारी के अनुसार नवनिर्मित 188.9 किलो मीटर लंबी रेलखंड मे सीतामढ़ी क्षेत्राधिकार का 88.9 किलो मीटर है। उक्त रेल खंड का काम पूरा हुआ तो यह रेल लाइन सीतामढ़ी से अमघट्टा होते हुए भैरोकोठी, बरियारपुर, बथनाहा, लत्तीपुर, दिग्घी, गोनाही, बेला, परसा, दोस्तियां, चिलारा, हरिहरपुर, दलकवा, राजबाड़ा, पकड़िया, नरंगा, परिहार, मसहां, बनौली, सुरसंड, भिट्ठामोड़ व चोरौत आदि गांवों से गुजरते हुए जयनगर-निर्मली तक जाएगी।
मिथिलांचल और सीमांचल को मिलेगा सीधा फायदा:
इस रेल लाइन के शुरू होने से सीतामढी, जयनगर, मधुबनी और निर्मली समेत पूरे सीमांचल और मिथिलांचल क्षेत्र को बेहतर रेल कनेक्टिविटी मिलेगी। अभी इन इलाकों में रेल नेटवर्क सीमित है, जिससे व्यापार और आवागमन में कठिनाइयां होती हैं।
नई रेल लाइन बनने के बाद न सिर्फ यात्रा आसान होगी, बल्कि कृषि उत्पादों, छोटे उद्योगों और स्थानीय व्यापार को भी बड़ा बाजार मिलेगा। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और पलायन पर भी कुछ हद तक अंकुश लग सकेगा।
नेपाल सीमा तक मजबूत होगा संपर्क:
इस रेल खंड का निर्माण होने से सीतामढ़ी-बथनाहा-परिहार और सुरसंड को बेहतर रेल कनेक्टिविटी देगी, बल्कि भारत-नेपाल सीमा के पास आर्थिक गतिविधियों को भी मजबूती प्रदान करेगी। सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का विकास तेज होगा और सुरक्षा व्यवस्था और सशक्त होगी।

