सोशल मीडिया के जरिए लोगों के बीच भ्रम या अफवाह फैलाने वालों पर अब बिहार सरकार शिकंजा कसेगी. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फैल रहे आपत्तिजनक, भ्रामक और कानून के खिलाफ कंटेंट को रोकने के लिए बिहार सरकार ने एक अहम कदम उठाया है. अब साइबर क्राइम और सुरक्षा इकाई के पुलिस उपमहानिरीक्षक को राज्य का नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है.
उन्हें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर गैरकानूनी कंटेंट को हटाने के लिए सीधे ‘टेकडाउन नोटिस’ जारी करने का अधिकार दिया गया है. सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की धारा 79(3) (b) और आईटी नियम 2021 में बदलाव करते हुए गृह विभाग (विशेष शाखा) की ओर से इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी गई है.
ऐसा करने पर भेजा जाएगा ‘टेकडाउन नोटिस’
नए बदलाव के मुताबिक, अगर किसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऐसा कंटेंट पाया जाता है जो कानून का उल्लंघन करता हो, सांप्रदायिक तनाव फैलाता हो या अफवाह और नफरत बढ़ाता हो, तो सीसीएसयू के डीआईजी उस प्लेटफॉर्म को तुरंत उसे हटाने का निर्देश देंगे.
अभी तक इस स्तर के अधिकारी के पास ‘टेकडाउन’ का अधिकार नहीं था. सोशल मीडिया कंपनियां जैसे फेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म अगर सरकार के आदेशों का पालन नहीं करतीं, तो उन्हें आईटी एक्ट के तहत जिम्मेदार ठहराया जा सकता है.
नई व्यवस्था से जुड़ी खास जानकारियां
- डीआईजी को मिला पावर- बिहार के साइबर सेल के डीआईजी को अब सीधे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को ‘टेकडाउन नोटिस’ जारी करने का कानूनी अधिकार दे दिया गया है.
- हटाना होगा कंटेंट- फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स और व्हाट्सएप को अब भ्रामक, सांप्रदायिक या गैरकानूनी पोस्ट्स को आदेश मिलते ही तुरंत हटाना होगा.
- सेफ हार्बर का खतरा- यदि सोशल मीडिया कंपनियां नोटिस का पालन नहीं करती हैं, तो वे आईटी एक्ट की धारा 79 के तहत मिलने वाली “कानूनी सुरक्षा” खो देगी और उन पर मुकदमा चल सकेगा.
- केंद्रीकृत मॉनीटरिंग- डीआईजी की ओर से की गई कार्रवाई की रिपोर्ट सीधे आईटी सचिव को भेजी जायेगी, जिससे पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहेगी.
- स्थानीय निगरानी- अब जिलों के डीएम और एसपी भी स्थानीय स्तर पर सोशल मीडिया पर कड़ी नजर रखेंगे और सीधे मुख्यालय को रिपोर्ट करेंगे ताकि अफवाहों को फैलने से रोका जा सके.

