नवादा जिले के हिसुआ विधानसभा से चार बार चुने गए भाजपा के वरिष्ठ विधायक अनिल सिंह ने केंद्र सरकार के यूजीसी इक्विटी रेगुलेशंस 2026 (UGC Bill 2026) के खिलाफ खुली बगावत कर दी है. सत्ता में रहते हुए अपनी ही पार्टी के नेताओं और शिक्षा मंत्रालय पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि यह बिल सामान्य वर्ग (स्वर्ण समाज) के छात्रों-शिक्षकों के साथ भेदभाव करता है. अनिल सिंह ने स्पष्ट किया कि वे पूरी तरह स्वर्ण समाज के साथ हैं और सड़कों पर उतरकर विरोध जारी रखेंगे.
‘ब्लैकमेलिंग का खतरा बढ़ गया है’
विधायक अनिल सिंह ने बिल को ‘एकतरफा’ बताते हुए कहा कि 15 जनवरी 2026 को जारी इस अधिसूचना में एससी-एसटी-ओबीसी श्रेणियों के लिए शिकायत निवारण समिति का प्रावधान है, लेकिन सामान्य वर्ग के बच्चों के खिलाफ भेदभाव या फर्जी शिकायतों पर कोई मजबूत सुरक्षा नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि फर्जी शिकायतों पर कार्रवाई का पुराना प्रावधान हटा दिया गया, जिससे ब्लैकमेलिंग का खतरा बढ़ गया है. यह कैसा न्याय है कि किसी के साथ भेदभाव न हो, लेकिन हमारे साथ हो? अनिल सिंह ने पूछा. उन्होंने 2012 की दिग्विजय सिंह कमेटी का हवाला देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए, लेकिन वर्तमान मसौदा उल्टा काम कर रहा है.विधायक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ के नारे का जिक्र करते हुए मांग की कि तुरंत संशोधन हो.
‘युवाओं के विरोध प्रदर्शन तेज’
उन्होंने संकेत दिया कि शिक्षा मंत्री और पार्टी के कुछ सदस्यों ने गंभीरता से मुद्दे नहीं देखा. अगर समाधान नहीं निकला तो यह माना जाएगा कि कॉलेजों में जाति के नाम पर बंटवारा बोया जा रहा है, उन्होंने चेतावनी दी. नवादा में युवाओं के विरोध प्रदर्शन तेज हो चुके हैं, जहां भाजपा कार्यालय का घेराव और पीएम मोदी-अमित शाह के पुतले दहन हुए. अनिल सिंह का यह रुख भाजपा के भीतर असंतोष को उजागर करता है, क्योंकि सामान्य वर्ग पार्टी का मजबूत वोट बैंक है. उन्होंने कहा, ‘जो भी करना पड़ेगा, सड़क पर उतरेंगे, लेकिन पीछे नहीं हटेंगे.’ यह घटना भारत में पहली बार सत्ता पक्ष के विधायक द्वारा अपनी सरकार के बिल के खिलाफ इतनी खुली बगावत का उदाहरण है.

