ग्रामीण/शहरी क्षेत्रों में जमीन की रजिस्ट्री महंगी होने वाली है। भूमि के मौजूदा बाजार मूल्य और सरकारी दर के बड़े अंतर को खत्म करने को जिले के निबंधन कार्यालयों के स्तर से (एमवीआर) न्यूनतम मूल्य दर की समीक्षा की जा रही है। निबंधन विभाग ने नगर निगम से सभी वार्डों की सड़कों और सभी सीओ से पेरीफेरल मौजा की सूची मांगी है। बताया गया है कि एमवीआर बढ़ने पर जमीन की खरीद-बिक्री महंगी हो जायेगी। मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग ने निर्देश पर इस दिशा में कार्रवाई तेज कर दी गई है।
विभाग को भेजी जायेगी समीक्षा रिपोर्ट
बताया गया है कि जिले में एमवीआर (न्यूनतम मूल्य दर) की समीक्षा चल रही है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में किए गए वर्गीकरण के आधार पर वर्तमान बाजार दर का वास्तविक आंकलन कर नई दर का प्रस्ताव से संबंधित रिपोर्ट विभाग को भेजी जाएगी। यदि सर्किल रेट बढ़ता है, तो स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क में भी बड़ा बदलाव आएगा, लिहाजा जमीन की रजिस्ट्री महंगी हो जाएगी।
नगर निगम क्षेत्र की भूमि का बढ़ेगा रजिस्ट्री शुल्क
बता दें कि नगर परिषद्, नगर पंचायत डुमरा, पुनौरा, मेहसौल और मधुबन समेत अन्य क्षेत्रों को शामिल कर नगर निगम का गठन किया गया है। साथ ही जिले के कई प्रखंडों में भी शहरी क्षेत्र का विकास हुआ है, वहीं, पुनौरा धाम को विकसित करने की योजना से इसके आसपास के क्षेत्र अब व्यवसायिक दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण हो गए हैं, जिसके कारण इन क्षेत्रों में जमीन के मूल्य में भी काफी बढ़ोतरी हुई है। विभाग ने मुख्य सड़क और विकसित मोहल्लों में बाजार मूल्य के साथ ही सरकारी दर के इस बड़े अंतर को समाप्त करने के लिए यह कदम उठाया है। इससे रजिस्ट्री तो महंगी होगी और सरकार का राजस्व बढ़ेगा।
शहरी/ग्रामीण क्षेत्रों का वर्षों से एमवीआर स्थिर
पिछले कई वर्षों में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों का काफी विस्तार हुआ है। विभिन्न मुख्य और संपर्क सड़कों का निर्माण हुआ है, जिससे जमीन का बाजार मूल्य बढ़ा, लेकिन विभागीय रेट स्थिर रहा। विभाग का मानना है कि वर्तमान में जमीन के सरकारी दर एवं बाजार मूल्य में काफी अंतर है। इस अंतर को खत्म करने के लिए विभाग ने एमवीआर की समीक्षा कर रिपोर्ट की मांग की है। साल 2013 के बाद ग्रामीण क्षेत्रों और साल- 2016 के बाद शहरी क्षेत्रों के एमवीआर में वृद्धि नहीं की गई है।
पूरे वर्ष में 42 हजार से अधिक डीड हुए रजिस्टर्ड
पूरे में जमीन की खरीद-बिक्री बढ़ी है। जिला निबंधन कार्यालय की रिपोर्ट मानें, तो के अनुसार चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में दिसंबर माह तक कुल 42,385 डीड रजिस्टर्ड हुए है। इससे करीब 167.42 करोड़ रूपये बतौर राजस्व की प्राप्ति हुई है। यह उपलब्धि लक्ष्य का 67.86 फीसदी है। राज्य रैंकिंग में सीतामढ़ी राजस्व प्राप्ति में छठा स्थान प्राप्त किया है। विभाग से जिला को 246.73 करोड़ रूपये राजस्व का लक्ष्य मिल हुआ है। इसकी जानकारी जिला अवर निबंधक डॉ पंकज कुमार बसाक ने दी।

