भारत अब केवल दुनिया के लिए चिप डिजाइन ही नहीं करेगा बल्कि उन्हें अपनी धरती पर बनाएगा भी. सेमीकंडक्टर की रेस में भारत ने अब अपनी गियर बदल दी है. केंद्रीय आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ऐलान कर दिया है कि सरकार ने साल 2032 तक देश में 3-नैनोमीटर यानी 3nm चिप्स के निर्माण का लक्ष्य रखा है. ये वही अल्ट्रा-सोफिस्टिकेटेड चिप्स हैं जो आज के दौर के सबसे महंगे स्मार्टफोन्स और सुपर-कंप्यूटर्स को ताकत देते हैं. अगर ऐसा हुआ तो दुनिया के सबसे महंगे और पावरफुल स्मार्टफोन्स के अंदर धड़कने वाला प्रोसेसर किसी दूसरे देश का नहीं बल्कि मेड इन इंडिया होगा.
डिजाइन के बाद अब ‘मैन्युफैक्चरिंग’ पर निगाहें
27 जनवरी को 23 चिप डिजाइन फर्मों के साथ बैठक के बाद मंत्री वैष्णव ने कहा कि भारत चिप डिजाइनिंग में तो पहले से ही मजबूत है लेकिन अब असली चुनौती और लक्ष्य इन बारीक पुर्जों को भारत में ही तैयार करना. उन्होंने बताया कि हमारा लक्ष्य 2032 तक 3nm चिप्स की डिजाइनिंग और मैन्युफैक्चरिंग दोनों में भारत को आत्मनिर्भर बनाना.
2029 का है ये टारगेट
चिप मैन्युफैक्चरिंग को सरकार ने दो चरणों में बांटा है. फाइनल टारगेट 2032 है लेकिन इससे पहले साल 2029 तक भारत अपनी 70-75% देश की जरूरतों को पूरा करने वाले चिप्स खुद बनाने और डिजाइन करने लगेगा. इसके लिए सरकार डिजाइन-लिंक्ड इंसेंटिव (DLI) योजना के दूसरे चरण पर भरोसा कर रही है.
इन 6 सेक्टर पर रहेगा खास फोकस
भारत को ग्लोबल हब बनाने के लिए सरकार ने 6 कोर कैटेगरीज की पहचान की है, जिनमें है कंप्यूट, रेडियो फ्रीक्वेंसी, नेटवर्किंग, पावर, सेंसर्स, मेमोरी.
ये छह सेक्टर मिलकर ऑटोमोबाइल से लेकर टेलीकॉम तक हर आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक एप्लिकेशन की रीढ़ बनते हैं. वैष्णव के अनुसार सरकार इस इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए देश की यूनिवर्सिटीज और इंडस्ट्री को एक साथ लाकर नए सॉल्यूशंस पर काम करेगी.
मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने में इंडस्ट्री और अकादमिक संस्थानों की साझेदारी बहुत ही जरूरी होगी. टेलीकॉम, ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे सभी सेक्टर में इन छह तरह की चिप्स का अलग-अलग संयोजन इस्तेमाल होता है. सरकार का मानना है कि इस रणनीति से भारत एक टेक्नोलॉजी कंज्यूमर देश से निकलकर ग्लोबल सेमीकंडक्टर हब बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा.

