रक्सौल/सीतामढ़ी, 27 जनवरी 2026: बिहार के रक्सौल से नेपाल की राजधानी काठमांडू तक रेल यात्रा अब महज 2-3 घंटे में पूरी हो सकेगी। 136 किलोमीटर लंबी इस ब्रॉडगेज रेल परियोजना का फाइनल लोकेशन सर्वे (FLS) दिसंबर 2025 तक पूरा हो चुका है और डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) इस वर्ष फाइनल होने की कगार पर है। कोंकण रेलवे द्वारा संचालित सर्वेक्षण 80% से अधिक पूर्ण हो चुका है, जिससे जनवरी 2026 में भूमि अधिग्रहण और टेंडर प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है।
यह 25,000 करोड़ रुपये (लगभग) की महत्वाकांक्षी परियोजना भारत और नेपाल के बीच कनेक्टिविटी, व्यापार और पर्यटन में क्रांति लाएगी। वर्तमान में सड़क मार्ग से 5-6 घंटे लगने वाली रक्सौल-काठमांडू दूरी रेल से घटकर 2-3 घंटे रह जाएगी। रूट में 13 स्टेशन होंगे: रक्सौल (भारत) → वीरगंज → जीतपुर → निजगढ़ → शिखरपुर → सिसनेरी → सतीखेल → चोभर (काठमांडू)। परियोजना में 32 ओवरब्रिज, 53 अंडरपास और विद्युतीकृत ट्रैक शामिल हैं, जो पहाड़ी इलाकों में आधुनिक बुनियादी ढांचा प्रदान करेंगे।
मुख्य लाभ जो बिहार-नेपाल को देंगे नया आयाम:
- तेज़ और सुरक्षित यात्रा: रक्सौल से काठमांडू का सफर आरामदायक और कम समय वाला बनेगा, जिससे सीमा पार आवागमन आसान होगा।
- व्यापार में उछाल: वीरगंज कॉरिडोर के जरिए भारत-नेपाल व्यापार सरल-सस्ता होगा, आयात-निर्यात बढ़ेगा।
- पर्यटन को बल: भारतीय पर्यटक काठमांडू, पोखरा, पशुपतिनाथ और मुक्तिनाथ आसानी से पहुँचेंगे; वहीं नेपाली तीर्थयात्री बोधगया जैसे स्थलों पर सरलता से आएंगे।
- दिल्ली-काठमांडू कनेक्शन: रक्सौल के मौजूदा दिल्ली लिंक से भारत की राजधानी सीधे नेपाल से जुड़ेगी, द्विपक्षीय संबंध मजबूत होंगे।
- रोजगार सृजन: निर्माण और संचालन से स्थानीय स्तर पर हजारों प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष नौकरियाँ पैदा होंगी।
यह परियोजना 2021 में केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत हुई थी, जबकि दिल्ली-काठमांडू रेल कनेक्टिविटी की कवायद 2022 से शुरू हुई। पूर्व सर्वे में लागत 25,000 करोड़ आँकी गई थी, जो DPR के बाद थोड़ी बढ़ सकती है। पूमरे कंस्ट्रक्शन विभाग को सौंपी रिपोर्ट के अनुसार, कार्य पूर्ण होने पर रेल नेटवर्क में ऐतिहासिक बदलाव आएगा।
बिहार के रक्सौल जैसे सीमावर्ती क्षेत्र के लिए यह परियोजना आर्थिक समृद्धि का द्वार खोलेगी। स्थानीय व्यापारी और पर्यटन उद्योग इसकी प्रतीक्षा में हैं।

