शिक्षा विभाग की गंभीर लापरवाही एक बार फिर सामने आई है। फर्जी शैक्षणिक और प्रशैक्षणिक प्रमाण पत्र के आधार पर सेवा से बर्खास्त किए गए शिक्षकों से इंटरमीडिएट परीक्षा में ड्यूटी कराए जाने का मामला उजागर हुआ है। इस घटना के बाद विभाग की कार्यशैली और प्रशासनिक समन्वय पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
जानकारी के अनुसार, बथनाहा प्रखंड में कार्यरत सात प्रखंड शिक्षकों को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, मुजफ्फरपुर की जांच में प्रमाण पत्र फर्जी पाए जाने के बाद सेवा से बर्खास्त किया गया था।
जिला शिक्षा पदाधिकारी, सीतामढ़ी के पत्रांक-2958 (दिनांक 19 जुलाई 2024) तथा जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) के पूर्व आदेशों के आलोक में यह कार्रवाई की गई थी।
24 अगस्त 2024 को प्रखंड शिक्षक नियोजन इकाई, बथनाहा की बैठक में नियोजन एवं सेवा शर्त नियमावली 2006 (संशोधित 2008, 2012 एवं 2020) के तहत सभी सात शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया था। इस मामले में संबंधित थानों में प्राथमिकी भी दर्ज है।
इसके बावजूद दो फरवरी से शुरू हुई इंटरमीडिएट परीक्षा में दो बर्खास्त शिक्षकों राम पुकार राय (मध्य विद्यालय सिरसिया, नियोजन वर्ष 2007) और पूनम कुमारी (मध्य विद्यालय सिरसिया, नियोजन वर्ष 2010) को वीक्षक के रूप में ड्यूटी पर तैनात कर दिया गया।
सूत्रों के मुताबिक राम पुकार राय की ड्यूटी सीतामढ़ी उच्च माध्यमिक विद्यालय, डुमरा में जबकि पूनम कुमारी की ड्यूटी रघुनाथ झा कॉलेज परीक्षा केंद्र पर लगाई गई थी।
मामला तब उजागर हुआ जब परीक्षा ड्यूटी समाप्त होने के बाद दोनों शिक्षक अपने मूल विद्यालय पहुंचे और प्रधानाध्यापक को विरमण पत्र सौंपा। शिक्षकों का दावा था कि उनकी ड्यूटी जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय से निर्धारित की गई थी और आगामी मैट्रिक परीक्षा में भी उनकी तैनाती की गई है।
वहीं विद्यालय प्रधानाध्यापक ने स्पष्ट किया कि संबंधित शिक्षकों को 30 अक्टूबर 2024 को ही नियोजन इकाई द्वारा बर्खास्त कर दिया गया था और तत्कालीन डीपीओ (स्थापना) के आदेश पर उनकी उपस्थिति दर्ज करने पर भी रोक लगा दी गई थी।
इस स्थिति में यह सवाल उठ रहा है कि जब सेवा समाप्ति का आदेश प्रभावी था और हाजिरी पर रोक लगी हुई थी, तब परीक्षा ड्यूटी सूची में इन शिक्षकों का नाम किस आधार पर शामिल किया गया। यह केवल तकनीकी त्रुटि नहीं, बल्कि परीक्षा जैसी संवेदनशील प्रक्रिया की निष्पक्षता और प्रशासनिक विश्वसनीयता से जुड़ा गंभीर मामला माना जा रहा है।
इस संबंध में जिला शिक्षा पदाधिकारी राघवेंद्र मणि त्रिपाठी ने कहा कि मामले की जांच की जा रही है। बर्खास्त शिक्षकों को ड्यूटी पर कैसे लगाया गया, इसकी जांच कर जिम्मेवारी तय की जाएगी और दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।

