माघ के महीने में स्नान दान का बहुत महत्व होता है। माना जाता है कि इस माह में पवित्र नदियों में स्नान करने से कई जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं। माघ स्नान से तन, मन और आत्मा की शुद्धि होती है। हिंदू कैलेंडर के 11वें महीने को बेहद खास और पुण्यदायी माना जाता है। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में हर साल माघ मेले का आयोजन किया जाता है। इस बार माघ मेला शनिवार, 3 जनवरी 2026 से शुरू होगा और 15 फरवरी 2026 तक चलेगा।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माघ के महीने में तीर्थों में श्रेष्ठ प्रयागराज में त्रिवेण संगम में किया गया स्नान हजारों यज्ञों के बराबर माना जाता है। माना जाता है कि इससे व्यक्ति पर दैवीय कृपा होती है और पुण्य फल की प्राप्ति होती है। शास्त्रों में वर्णित है कि माघ के महीने में देवता भी प्रयागराज आते हैं।
प्रयाग और माघ मेले का संबंध
मत्स्य पुराण और पद्म पुराण के अनुसार ब्रह्मा जी ने सृष्टि का निर्माण करने से पहले यहां ‘अश्वमेध यज्ञ’ किया था। इस यज्ञ के कारण ही इस स्थान का नाम ‘प्रयाग’ पड़ा। इसमें प्र का अर्थ है प्रथम, वहीं याग का मतलब है यज्ञ। लेकिन, माघ मेला यहां लगने की सबसे बड़ी वजह अमृत की बूंदें मानी जाती हैं। पौराणिक कथा के अनुसार, समुद्र मंथन से निकले अमृत कलश को लेकर जब देवताओं और असुरों में छीना-झपटी हुई, तब अमृत की कुछ बूंदें पृथ्वी पर चार स्थानों पर गिरी थीं- हरिद्वार, उज्जैन, नासिक और प्रयागराज। माघ के महीने में प्रयागराज के संगम का जल साक्षात अमृत के समान हो जाता है, इसीलिए यहां स्नान का फल मोक्षदायी माना गया है।
माघ महीने से शुरू होता है एक माह का कल्पवास
माघ महीने में मेले के साथ-साथ ‘कल्पवास’ भी आरंभ होता है। इस अवधि में लोग संगम तट पर सात्विक जीवन जीते हैं। कल्पवासी जमीन पर सोते हैं, दिन में केवल एक बार भोजन करते हैं और तीन बार गंगा स्नान करते हैं। मान्यता है कि कल्पवास में जप-तप करने वाले जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति पा जाते हैं।

