बिहार की रेल कनेक्टिविटी को लेकर अच्छी खबर सामने आई है. सालों से फाइलों में बंद पड़ी जिस रेल लाइन का लोगों को बेसब्री से इंतजार था, वह पटरी पर लौटने वाली है. हम बात कर रहे हैं, 188 किलोमीटर लंबी सीतामढ़ी–जयनगर–निर्मली रेल परियोजना की, जिसे आखिरकार 17 साल बाद डी-फ्रीज किया गया है. इस पहल से मिथिलांचल और सीमांचल में विकास को गति मिल सकेगी.
रेल परियोजना को मिली गति
बता दें कि साल 2008-09 में इस योजना को मंजूरी मिली थी, लेकिन साल 2019 में रेलवे बोर्ड ने इस परियोजना पर रोक लगा दी. पूर्व मध्य रेलवे के महेंद्र घाट, पटना कार्यालय से जारी पत्र के अनुसार, लंबे समय से रुकी इस परियोजना को अब दोबारा गति देने का काम किया जा रहा है. डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार होने के बाद आगे की प्रक्रिया का रास्ता साफ होगा.
परियोजना को लेकर रेलवे गंभीर
एक नए टेंडर भी आमंत्रित किया गया है, इस पहल से साफ है कि रेलवे गंभीर है. बिहार सरकार के ऊर्जा, योजना एवं विकास मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव ने भी इस परियोजना को आगे बढ़ाने की पुष्टि की है. इस रेल लाइन के शुरू होने से सुपौल, मधुबनी और सीतामढ़ी समेत पूरे मिथिलांचल और सीमांचल क्षेत्र में बेहतर रेल कनेक्टिविटी की सुविधा मिलेगी, जिससे लोगों को भी राहत मिलेगी.
फिलहाल, इन इलाकों में रेल नेटवर्क सीमित है, जिससे व्यापार समेत कई गतिविधियों में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है. नई रेल लाइन बनने के बाद यात्रियों को सुविधा मिलेगी. साथ ही, कृषि उत्पादों, छोटे उद्योगों और स्थानीय व्यापार को भी बाजार का मौका मिलेगा. इससे रोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे और पलायन पर भी इसका असर पड़ेगा.

