सीतामढ़ी नेपाल की संसद के निचले सदन नेपाल प्रतिनिधि सभा के लिए गुरुवार को शांतिपूर्ण माहौल में मतदान संपन्न हुआ। नेपाल में संसदीय चुनाव एक विशेष मिश्रित चुनाव प्रणाली (मिक्स्ड इलेक्टोरल सिस्टम) के तहत कराए जाते हैं, जिसमें मतदाता एक ही समय में दो अलग-अलग वोट डालते हैं। इसी व्यवस्था के तहत कुल 275 सांसदों का चुनाव होता है। नेपाल की यह चुनाव प्रणाली कुछ हद तक भारत के 8 राज्यों जैसे बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा, झारखंड, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड और ओडिशा में होने वाले नगर निगम चुनावों से मिलती-जुलती है।
वहां भी मतदाता अलग-अलग पदों के लिए अलग-अलग वोट डालते हैं। जिसमे मतदाता तीन वोट डालते हैं, जिसमे एक स्थानीय पार्षद के लिए और एक सीधे मेयर और डिप्टी मेयर के लिए होता है। ठीक उसी तरह नेपाल में दो अलग-अलग तरीकों से सांसद चुने जाते हैं। इसलिए मतदान के समय मतदाताओं को दो बैलेट पेपर दिए जाते है, जिसके तहत जनता अपना स्थानीय सांसद का चुनाव करती है जिसे फस्ट पार्ट द पोस्ट (एफपीटीपी) सिस्टम कहा जाता है। वही दूसरा सरकार चुनने के लिए मतदान किया जाता है। जिसे आनुपातिक प्रतिनिधित्व (पीआर) सिस्टम कहा जाता है।
इन दोनों वोटों के आधार पर संसद की 275 सीटों का ये है आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली दूसरे बैलेट पेपर में मतदाता किसी व्यक्ति को नहीं बल्कि किसी राजनीतिक पार्टी को वोट देते हैं। इस प्रणाली को आनुपातिक प्रतिनिधित्व (पीआर) सिस्टम कहा जाता है। इस व्यवस्था के तहत 110 सांसदों का चयन होता है। पूरे देश में किसी पार्टी को जितने प्रतिशत वोट मिलते हैं, उसी अनुपात में उसे संसद में सीटें दी जाती हैं। उदाहरण के लिए यदि किसी पार्टी को देशभर में 10 प्रतिशत वोट मिलते हैं, तो उसे लगभग उतने ही प्रतिशत सीटें मिल सकती हैं।

