सीतामढ़ी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी की इंजीनियरिंग अंतिम वर्ष की छात्रा मेधा परासर की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद जिलेभर में आक्रोश फैल गया है। शनिवार देर शाम बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने मेधा को श्रद्धांजलि देने और दोषियों को सजा दिलाने की मांग को लेकर कैंडल मार्च निकाला।
कैंडल मार्च के दौरान छात्रों के हाथों में मोमबत्तियां और तख्तियां थीं, जिन पर “मेधा को इंसाफ दो”, “लापरवाही नहीं चलेगी” और “छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करो” जैसे नारे लिखे थे। छात्रों ने कॉलेज प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया।
समय पर गाड़ी और उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई
छात्रों का आरोप है कि मेधा को समय पर गाड़ी और उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई, जिसके कारण उसे सही इलाज नहीं मिल सका। उनका दावा है कि यदि समय पर एम्बुलेंस या कॉलेज की गाड़ी मिल जाती, तो शायद मेधा की जान बचाई जा सकती थी।
छात्र प्रतिनिधियों ने बताया कि मेधा पढ़ाई में होनहार थी और कुछ ही महीनों में उसकी इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी होने वाली थी। परिवार की उससे काफी उम्मीदें थीं। छात्रों ने इस घटना के लिए प्रशासनिक लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया।
निष्पक्ष जांच और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग
कैंडल मार्च के बाद छात्रों ने निष्पक्ष जांच और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। इस दौरान कॉलेज परिसर में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। पुलिस अधिकारियों ने छात्रों से शांति बनाए रखने और मामले की जांच का आश्वासन दिया।
मेधा परासर की मौत से उसके गांव और परिवार में भी शोक की लहर है। परिजन लगातार न्याय की मांग कर रहे हैं। छात्रों ने कहा है कि जब तक मेधा को न्याय नहीं मिलेगा, उनका आंदोलन जारी रहेगा। कैंडल मार्च के माध्यम से छात्रों ने यह संदेश दिया कि वे केवल श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि सिस्टम में सुधार और जवाबदेही भी चाहते हैं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।

