प्रथम महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले की जयंती पर अलग-अलग जगहों पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस क्रम में जननायक कर्पूरी ठाकुर अत्यंत पिछड़ा वर्ग छात्रावास, सीतामढ़ी के सभागार में राष्ट्रमाता माता सावित्री बाई फूले की जयंती बिनोद बिहारी मंडल, छात्रावास अधीक्षक की अध्यक्षता में धूमधाम से मनाया गया।
समारोह में उपस्थित सभी लोगों ने उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। समारोह के मुख्य अतिथि फूले अम्बेडकरी विचारधारा के प्रमुख स्तंभ प्रो. शशिभूषण प्रसाद सिंह ने कहा कि आधुनिक भारत की पहली महिला शिक्षिका माता सावित्री बाई फूले ने अपने पति महात्मा ज्योतिबा राव फूले से प्रेरणा लेकर सदियों से शिक्षा एवं मौलिक अधिकारों से वंचित कमजोर वर्गों के लिए बालिका विद्यालय की स्थापना कर शिक्षा का द्वार सबके लिए खोला। उन्होंने समाज में व्याप्त कुरीतियां अंधविश्वास, पाखंड, रूढ़िवादिता, छुआछूत, के खिलाफ सत्य शोधक समाज की स्थापना कर लोगों को जागृत किया। विधवा विवाह को प्रोत्साहित किया। जीवन पर्यन्त रोगियों की सेवा करती रही। उनके जीवन संघर्ष को आत्मसात करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। कृषि सहायक संजय पासवान ने कहा कि भारत में सबके लिए शिक्षा का द्वार खोलने के लिए तत्कालीन अंग्रेजी सरकार से 1848 ई. चार्टर एक्ट के माध्यम से कानून बनवाया। पुणे में पहला आवासीय बालिका विद्यालय की स्थापना की।
छात्रावास अधीक्षक बिनोद बिहारी मंडल ने कहा कि जो देश एवं समाज अपने महापुरुषों के इतिहास एवं बलिदान को भूल जाता है, वह गुलाम हो जाता हैं। उन्होंने माता सावित्री बाई फूले के द्वारा समाज सुधार के लिए चलाए गए आंदोलन को आगे बढ़ाने की अपील की। जयंती समारोह को नागेंद्र पासवान, कमल किशोर, धनंजय साहनी, राजकपूर, साजन कुमार, राजीव कुमार, सुनील सहनी, पिंकू मंडल, शैलेन्द्र कुमार, सुधीर कुमार, अनीश कुमार, संजीत कुमार, गोविंद कुमार, नंदकिशोर कुमार, हरिश्चंद्र कुमार, नीरज कुमार, सिद्धांत कुमार, सुबोध कुमार, रौशन कुमार सहित दर्जनों छात्र एवं अभिभावक उपस्थित थे।
तरियानी|सावित्रीबाई फुले की याद में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि वो भारत की पहली महिला शिक्षिका, समाज सुधारक और कवयित्री थीं। उनका जन्म 3 जनवरी 1831 को महाराष्ट्र के सतारा जिले के नायगांव में हुआ था। उनके पिता का नाम खंदोजी नैवेसे और माता का नाम लक्ष्मीबाई था। सावित्रीबाई ने अपने पति महात्मा ज्योतिबा फुले के साथ मिलकर 1848 में बालिकाओं के लिए एक विद्यालय की स्थापना की सावित्रीबाई फुले ने महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष किया और उन्हें शिक्षा का हक दिलाया। उन्होंने विधवाओं के लिए एक आश्रय स्थल की स्थापना की और बाल विवाह के खिलाफ अभियान चलाया। सावित्रीबाई फुले ने अपने जीवन में कई चुनौतियों का सामना किया, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी।
पुरनहिया| नेचर फाउंडेशन के तत्वावधान में मध्य विद्यालय अशोगी में जयंती मनाई गई। इस अवसर पर उनके जीवन संघर्ष और महिलाओं को शिक्षा से जोड़ने में उनके योगदान पर चर्चा की गई। बताया गया कि उन्होंने अनेक चुनौतियों का सामना करते हुए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष किया। बाल विवाह का शिकार होने के बावजूद उन्होंने शिक्षा प्राप्त करने का संकल्प लिया और महिलाओं को शिक्षित करने के उद्देश्य से स्कूल खोले। इस जयंती समारोह में स्कूल के शिक्षक और शिक्षिकाएं उपस्थित रहे। नेचर फाउंडेशन के अध्यक्ष रंजीत कुमार, सचिव कुणाल कंचन, सदस्य यतेन्द्र भगत, रामदयाल भगत, निरंजन राय आदि थे।

