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The Voice Of Bihar > Blog > शिक्षा > क्या अब माइनस 40 नंबर वाले भी बनेंगे डॉक्टर? NEET PG की नई कट ऑफ से मेडिकल इमरजेंसी!
शिक्षा

क्या अब माइनस 40 नंबर वाले भी बनेंगे डॉक्टर? NEET PG की नई कट ऑफ से मेडिकल इमरजेंसी!

Saroj Raja
Last updated: 2026/01/15 at 8:23 AM
Saroj Raja
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8 Min Read
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सरकार के एक फैसले से बहस छिड़ी है, जिस पर काफी विवाद भी हो रहा है. केंद्र ने NEET PG में दाखिले के लिए नई कट-ऑफ तय की है. नई क्वालीफाइंग कट ऑफ में सबसे बड़ी छूट SC/ST/OBC कैंडिडेट्स को दी गई है. इसलिए ऐसे सवाल उठ रहे हैं. NBEMS यानी नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंस ने NEET PG में दाखिले के लिए परसेंटाइल कम कर दी है. अब जनरल और EWS के लिए 7 और SC/ST/OBC कैंडिडेट्स के लिए परसेंटाइल 0 कर दी गई है. कट ऑफ संशोधन के बाद SC/ST/OBC कैंडिडेट्स को माइनस 40 स्कोर करने पर भी एडमिशन मिल जाएगा.

Contents
SC, ST और OBC कैटेगरी के लिए चौंकाने वाला बदलावखाली सीटों की वजह से अब स्टैंडर्ड से ही समझौताये फैसला प्राइवेट कॉलेजों के लिए लॉटरी लगने जैसाआरोप- सरकार मेडिकल कॉलेज वालों को करोड़पती बनाना चाहती हैप्राइवेट कॉलेजों के लिए लॉटरी से कम नहीं

बता दें कि परसेंटाइल से किसी छात्र की रैंक पता चलती है और परसेंटाइल को तय करने के लिए परीक्षा में मिले नंबर और कुल उम्मीदवारों की संख्या, इन दोनों की मदद ली जाती है. आपके मन में ये सवाल होगा कि पहले ये परसेंटाइल कितना था तो बता दें कि इससे पहले 50 पर्सेंटाइल हासिल करने वाले जनरल कैटेगरी के कैंडिडेट्स को पीजी एडमिशन के लिए एलिजिबिल माना जाता था. वहीं SC/ST/OBC कैंडिडेट्स के लिए क्वालिफाइंग कटऑफ 40 पर्सेंटाइल थी. यानी जो नई कटऑफ है उसमें छात्रों को बहुत ज्यादा छूट दे दी गई है.

SC, ST और OBC कैटेगरी के लिए चौंकाने वाला बदलाव

जनरल और EWS उम्मीदवारों के परसेंटाइल कम होने से कट-ऑफ स्कोर 276 से घटकर 103 हो गया. सबसे चौंकाने वाला बदलाव SC, ST और OBC कैटेगरी के लिए है, जहां क्वालिफाइंग परसेंटाइल जीरो करने से माइनस 40 नंबर लाने वाले भी मेडिकल की पोस्ट ग्रेजुएशन पढ़ाई कर सकते हैं. इसी फैसले का विरोध हो रहा है क्योंकि अगर कोई SC ST OBC कैटेगरी का कैंडिडेट, परीक्षा में पूरा पेपर खाली छोड़ देगा, तो भी शायद उसका सेलेक्शन हो जाएगा.

MBBS की पढ़ाई के बाद पोस्ट ग्रैजुएशन में छात्र MS-MD जैसे मेडिकल कोर्स में दाखिला लेते हैं. इसके लिए वो NEET PG में शामिल होते हैं. पीजी की पढ़ाई के बाद कोई भी MBBS स्टूडेंट एक्सपर्ट डॉक्टर के तौर पर सर्टिफाइड होता है. ये पूरा विवाद इसलिए बढ़ा क्योंकि अब एक्सपर्ट डॉक्टर वो भी बनेंगे जिनके नंबर माइनस 40 या शून्य होंगे.

ज़रा सोचिए ऐसे डॉक्टर आपकी सर्जरी करेंगे तो क्या होगा. ऐसे डॉक्टर आपको दवा लिखेंगे तो क्या होगा. हमारे मेडिकल एजुकेशन की क्या इज्जत रह जाएगी? आज ऐसे कई सवाल पूछे जा रहे हैं क्योंकि डॉक्टर के हाथ में आपका जीवन और मृत्यु दोनों है. देशभर में कुल 60 हजार पीजी सीट के लिए परीक्षा होती है. इनमें सरकारी मेडिकल कॉलेजों के 33 हजार से अधिक और निजी कॉलेजों के 20 हजार से अधिक सीटें शामिल हैं.

खाली सीटों की वजह से अब स्टैंडर्ड से ही समझौता

हाई कट-ऑफ की वजह से 18 हजार सीटें खाली रह गईं. खाली सीटों की वजह से अब स्टैंडर्ड से ही समझौता गया. सोचिए MBBS की पढ़ाई के बाद छात्र MS-MD की ये परीक्षा देते हैं और कुछ भी स्कोर नहीं करते तो भी सेलेक्ट हो जाएंगे. ये स्थिति भी अपने आप में एक तरह की मेडिकल इमरजेंसी है. डॉक्टरी की उच्च शिक्षा में परसेंटाइल को जीरो या माइनस तक करने का असर कितना खतरनाक हो सकता है. भविष्य में भारत की शिक्षा व्यवस्था के लिए क्या दिक्कतें हो सकती हैं. इसकी चर्चा चिकित्सा जगत में ही चल रही है.

अलग-अलग संगठनों के डॉक्टर सरकार के परसेंटाइल सिस्टम पर चिंता जा रहे हैं. उन्हें इसके अंदर भ्रष्टाचार की साजिश नजर आ रही है. वो आरोप लगा रहे हैं कि इस फैसले में निजी मेडिकल कॉलेजों की चांदी है लेकिन मेडिकल शिक्षा का भविष्य चौपट हो जाएगा. वैश्विक स्तर पर इसके गंभीर नतीजे हो सकते हैं. हमने इसे लेकर FAIMA यानी फेडरेशन आफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोशिएशन और FORDA यानी फेडरेशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन से बात की.

ये फैसला प्राइवेट कॉलेजों के लिए लॉटरी लगने जैसा

FAIMA ने कहा कि ये फैसला प्राइवेट कॉलेजों के लिए लॉटरी लगने जैसा है. वहीं FORDA का कहना है कि एक-एक सीट पर एक निजी कॉलेज करोड़ों रुपये कमाएंगे. एक कॉलेज की कमाई 500 से 1000 करोड़ रुपए तक होगी.FAIMA के मुताबिक जो छात्र मेधावी नहीं होंगे वो पैसे के दम पर सीट खरीद सकेंगे, जिससे योग्य छात्र पीछे रह जाएंगे. FORDA का कहना है कि इस फैसले से अगले 10 साल में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय डॉक्टरों को मिलने वाला सम्मान खत्म हो जाएगा.

दोनों संगठनों का कहना है कि मेडिकल एजुकेशन में स्टैंडर्ड को मेंटेन रखना होगा. इसके लिए सरकार के सामने वो प्रजेंटेशन देंगे. फैसले के खिलाफ ये संगठन कोर्ट जाने के विकल्प पर भी विचार कर रहे हैं.

आरोप- सरकार मेडिकल कॉलेज वालों को करोड़पती बनाना चाहती है

नीट पीडी की परीक्षा में कट आफ को लेकर अलग-अलग संगठनों ने सरकार के फैसले को गलत बताया है. फेडरेशन आफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोशिएशन के प्रमुख डॉ रोहन कृष्णण ने टीवी9 भारतवर्ष से खास बातचीत में बताया कि यह फैसला देश में मेडिकल इन्फ्रास्ट्र्कचर के लिए घातक साबित होगा. उन्होंने कहा कि इस फैसले से प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की चांदी होगी. इसे लेकर फाइमा कोर्ट और सरकार के खिलाफ जाने के विकल्पों पर विचार कर रही है.

वहीं सरकार के इस फैसले के खिलाफ फोर्डा (फेडरेशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन) जो भारत में रेजीडेंट डॉक्टरों का एक संगठन है और उनके मुद्दों जैसे सुरक्षा, बेहतर कार्य परिस्थितियों और प्रशिक्षण से संबंधित मुद्दों को उठाता है ने सरकार के फैसले पर एतराज जताया है. फोर्डा के जेनरल सेकरेट्री डॉ शारदा ने टीवी9 भारतवर्ष से बातचीत में कहा कि इस मुद्दे पर हम जल्द ही अपनी जीबीएम बुलाने जा रहे हैं. यह फैसला मेडिकल स्टूडेंट्स के हक में नहीं है.

प्राइवेट कॉलेजों के लिए लॉटरी से कम नहीं

डॉ रोहन ने कहा कि यह फैसला प्राइवेट अस्पतालों के लिए लॉटरी लगने जैसा है. उन्होंने कहा कि इसमें वह लोग अधिक आएगे जो डिजर्व नहीं करते. उन्होंने कहा कि प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में खास करके व्यवस्था नहीं होती है ना शिक्षा व्यवस्था होती है ना पेशेंट होते ना डॉक्टर होते हैं. इन लोगों को 20-25 सीटें मिल गई हैं तो इनको जो सीट मिल जाती है तो वह यह क्या करते हैं. वह उन डॉक्टर जो कि आप अपने आप को मेरीटोरियस नहीं हैं वह पैसे के दम पर इन सीटों को खरीद लेते हैं. इससे कॉलेज को करोड़ों रुपए का फायदा होता है. डॉक्टर जो कि अपने मेहनत करते हो और अच्छे से करते हुए डॉक्टर उसको वह पार्ट वह पूरा खा जाते हैं और मेरिट कहीं ना कहीं पूरी तरह से कंप्रोमाइज हो जाता है.

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