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The Voice Of Bihar > Blog > सासाराम > जब एक DSP के मुद्दे पर भिड़ गये थे CM नीतीश और स्पीकर विजय सिन्हा, किसकी हुई जीत?
सासाराम

जब एक DSP के मुद्दे पर भिड़ गये थे CM नीतीश और स्पीकर विजय सिन्हा, किसकी हुई जीत?

Saroj Raja
Last updated: 2026/01/05 at 3:23 PM
Saroj Raja
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8 Min Read
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16 नवम्बर 2025 के पहले गृह विभाग मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास ही रहता था। करीब चार साल (मार्च 2022) पहले गृह विभाग से जुड़े एक विवाद पर बिहार विधानसभा में जबरदस्त हंगामा हुआ था। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तत्कालीन स्पीकर विजय कुमार सिन्हा पर सदन में ही आग बबूला हो गये थे। बेहद तल्ख तेवर में आसन के लिए कठोर शब्दों का इस्तेमाल किया था। विजय कुमार सिन्हा भी अपनी बात पर अड़े रहे। कुछ दिनों की जिच के बाद आखिर किसे झुकना पड़ा? नीतीश कुमार अपने विभाग के सवाल को लेकर क्यों आपे से बाहर हो गये? आइए जानते हैं।

Contents
स्पीकर ने कहा, दो पुलिस अधिकारियों ने अपमान कियासदन में बार-बार एक ही विषय उठाने से नीतीश नाराजजब नीतीश ने बेहद गुस्से में स्पीकर पर सवाल उठायाआखिरकार नीतीश कुमार ने डीएसपी को हटायाक्यों हुआ था यह सब ?पुलिस अधिकारियों से बात के बाद बढ़ा विवादमामले का राजनीतिक पेच

स्पीकर ने कहा, दो पुलिस अधिकारियों ने अपमान किया

मार्च 2022 में बिहार विधानमंडल का सत्र चल रहा था। उस समय स्पीकर विजय कुमार सिन्हा ने आरोप लगाया था कि लखीसराय में दो पुलिस अधिकारियों ने उनके साथ बदसलूकी की है। इसके बाद संसदीय कार्य मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव ने सरकार की ओर से जनवाब दिया कि इस मामले में उचित कार्रवाई की जाएगी। बिजेन्द्र प्रसाद यादव अपनी ईमानदारी के लिए जाने जाते हैं। लेकिन इन दो पुलिस अधिकारियों पर कोई एक्शन नहीं लिया गया। तब विजय कुमार सिन्हा ने तत्कालीन डीजीपी एके सिंघल को अपने विधानसभा अध्यक्ष कक्ष में तलब किया। लेकिन कहा जाता है कि डीजीपी ने स्पीकर की शिकायत पर कोई ध्यान नहीं दिया।

सदन में बार-बार एक ही विषय उठाने से नीतीश नाराज

सरकार का रवैया देख कर भाजपा के सदस्य नाखुश हो गये। स्पीकर ने कार्य मंत्रणा समिति के साथ बैठक की। लेकिन इसके बाद भी समस्या का कोई हल नहीं निकला। तब भाजपा विधायक एक-दो दिन के अंतराल पर सदन में यह मामला उठा कर गृह विभाग को घेरने लगे। सत्ता पक्ष ही जब सरकार (गृह मंत्री के रूप में नीतीश कुमार) को घेरने लगा तो विपक्ष को एक मुद्दा मिल गया। राजद के सदस्य जानबूझ कर विजय सिन्हा का पक्ष लेकर यह कहने लगे कि मुख्यमंत्री ने आसन (स्पीकर) का अपमान किया है। सरकार ही सदन की गरिमा को ठेस पहुंचा रही है। एक ही विषय को बार-बार उठाने से नीतीश कुमार नाराज रहने लगे।

जब नीतीश ने बेहद गुस्से में स्पीकर पर सवाल उठाया

15 मार्च 2020 को सदन की कार्यवाही चल रही थी। भाजपा के सदस्यों ने फिर लखीसराय का मामला उठाया। फिर हंगामा शुरू हो गया। नीतीश कुमार उस दिन अपने चैम्बर में बैठ कर टीवी सदन की कार्यवाही देख रहे थे। हंगामा देख कर वे अचानक सदन में आये। उनकी भाव-भंगिमा बहुत गुस्से में लग रही थी। उन्होंने आपे से बाहर हो कर स्पीकर विजय कुमार सिन्हा की तरफ बहुत जोर से कहा, क्या सदन चलाने का यही तरीका है ? जांच के दायरे में आने वाले मामलों को सदन में क्यों पेश किया जाना चाहिए ? क्या सदन को पुलिस की जांच रिपोर्ट मांगने का अधिकार है ? जांच रिपोर्ट मांगना, न्यायपालिका का क्षेत्राधिकार है। संविधान पढ़िए। सदन में नीतीश कुमार के इस रूप को देख सभी सदस्य हैरत में पड़ गये। मामला और उलझ गया। स्पीकर के अपमान का सवाल उठ गया।

आखिरकार नीतीश कुमार ने डीएसपी को हटाया

विवाद बढ़ने से बिहार एनडीए की किरकिरी होने लगी। तब डैमेज कंट्रोल की कोशिश शुरू हुई। नीतीश कुमार कुछ नरम हुए। अगले दिन शाम को विधानसभा की एनेक्सी में नीतीश कुमार, विजय कुमार सिन्हा और अन्य वरिष्ठ नेताओं की बैठक हुई। इस बैठक में मीडिया की इंट्री पर रोक लगा दी गयी। बातचीत के बाद तनाव शिथिल होने लगा। नीतीश ने आखिरकार 18 मार्च 2022 को इस मामले में एक्शन लिया। लखीसराय के डीएसपी रंजन कुमार को हटा कर उनकी जगह सैयद इमरान मसूद को वहां तैनात किया गया। स्पीकर विजय कुमार सिन्हा चाहते थे कि रंजन कुमार को हर हाल में लखीसराय से हटाया जाए।


क्यों हुआ था यह सब ?

ये कहानी शुरू हुई थी 4 फरवरी 2022 से। उस दिन सरस्वती पूजा थी। लखीसराय में पूजा के अवसर पर संगीत कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। आरोप लगा कि इस संगीत समारोह में कुछ युवकों ने हथियार लहरा कर डांस किया है। पुलिस का कहना था कि यह संगीत कार्यक्रम कोरोना प्रोटोकॉल के खिलाफ था। अगर हथियार लहराया गया है तो यह भी कानून के खिलाफ है। सरस्वती पूजा के पांच दिन बाद पुलिस ने इस मामले दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया। बाद में इन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। आरोप लगा कि जिन दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है वे निर्दोष हैं। उनके खिलाफ हथियार लहराने का प्रमाण नहीं है। जहां तक कोरोना प्रोटोकॉल तोड़ने का सवाल है तो कई जगहों पर संगीत कार्यक्रम का आयोजन किया गया था, वहां क्यों नहीं कार्रवाई हुई?

पुलिस अधिकारियों से बात के बाद बढ़ा विवाद

इसी क्रम में स्पीकर विजय सिन्हा लखीसराय के दौरे पर पहुंचे। लखीसराय उनका चुनाव क्षेत्र है। कहा जाता है कि जिन दो लोगों को गिरफ्तार किया गया था वे भाजपा के कार्यकर्ता थे। उनके परिजन उन्हें बेकसूर बता रहे थे और पुलिस पर जुल्म का आरोप लगा रहे थे। इस लिहाज से विजय सिन्हा ने इस घटना की जानकारी के लिए लखीसराय के डीएसपी रंजन कुमार और बड़हिया के थाना प्रभारी संजय कुमार सिंह को तलब किया। कहा जाता है कि विजय सिन्हा ने पुलिस अधिकारियों से उन दो लोगों पर से मामला वापस लेने के लिए कहा। जब हथियार लहराने का उन दोनों के खिलाफ कोई प्रमाण नहीं है तो फिर किस आधार पर कार्रवाई की गयी? इसके बाद विजय कुमार सिन्हा ने आरोप लगाया कि लखीसराय के डीएसपी ने उनका अपमान किया है।

मामले का राजनीतिक पेच

जब इस विषय पर विधानसभा में हंगामा हुआ था तब राजद के सदस्यों ने एक आरोप लगाया था। उनका कहना था कि चूंकि लखीसराय के ये दोनों पुलिस अधिकारी जदयू के अध्यक्ष और सांसद ललन सिंह के करीबी हैं इसलिए सरकार इनको बचाने में लगी है। राजद ने आरोप लगाया कि ललन सिंह के दबाव पर ही पुलिस के आला अफसर आरोपी थाना प्रभारी और डीएसपी पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। मालूम हो कि ललन सिंह और विजय कुमार सिन्हा एक ही जाति (भूमिहार ब्राह्मण) से हैं लेकिन दोनों में पटती नहीं है। ललन सिंह मुंगेर से सांसद हैं। जब कि लखीसराय, मुंगेर संदीय क्षेत्र का हिस्सा है। कहा जाता है कि स्थानीय राजनीति में वर्चस्व को लेकर दोनों में ठनी रहती है। लेकिन इस विवाद में नीतीश कुमार को झुकना पड़ा। थक-हार कर उन्हें विवाद का कारण रहे डीएसपी रंजन कुमार को लखीसराय से हटा कर दूसरी जगह भेजना पड़ा।

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