आज पौष पूर्णिमा के पावन संयोग पर 3 जनवरी 2026 से प्रयागराज के त्रिवेणी संगम तट पर माघ मेला 2026 का आध्यात्मिक शुभारंभ हो गया। भोर से ही संगम घाट “हर-हर गंगे” और वैदिक मंत्रोच्चार से गूंज उठा, जहां लाखों श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाकर पुण्य लाभ अर्जित करते दिखे। पौष पूर्णिमा स्नान इस मेले का पहला और प्रमुख स्नान पर्व माना जाता है, जिसमें देश-विदेश से आए संत, साधु, कल्पवासी और श्रद्धालु सहभागी होते हैं। पौष पूर्णिमा की तिथि शुक्रवार शाम 6 बजकर 54 मिनट से आरंभ हो चुकी है और इसका समापन शनिवार शाम 5 बजकर 35 मिनट पर होगा। इसी कारण पौष पूर्णिमा का पावन स्नान शनिवार को किया जाएगा। इस दिन पूर्ण चंद्रमा का दर्शन विशेष महत्व रखता है, जिसे धार्मिक परंपराओं में शुभ माना जाता है।
शनिवार को सूर्योदय सुबह 6 बजकर 56 मिनट पर हुआ, जबकि चंद्रमा का उदय शाम 5 बजकर 18 मिनट पर देखने को मिलेगा। ज्योतिषीय दृष्टि से भी यह दिन खास है। मिथुन राशि में गुरु और चंद्रमा की एक साथ स्थिति से गजकेसरी योग बन रहा है, जिसे सुख-समृद्धि देने वाला माना जाता है। वहीं धनु राशि में सूर्य, मंगल, बुध और शुक्र एक साथ स्थित रहेंगे, जिससे दिन की धार्मिक और आध्यात्मिक महत्ता और बढ़ जाएगी।प्रशासन के आकलन के अनुसार पहले ही दिन 20 से 30 लाख श्रद्धालुओं के स्नान करने की संभावना है, जबकि करीब चार लाख कल्पवासी एक माह तक चलने वाले कल्पवास की साधना आरंभ कर रहे हैं। पूरे 44 दिनों तक चलने वाले इस धार्मिक महासमागम में लगभग 15 करोड़ लोगों के आने का अनुमान है।
मेले को सुव्यवस्थित और सुरक्षित बनाने के लिए प्रयागराज में अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं। संगम क्षेत्र को नो-व्हीकल जोन घोषित किया गया है और घाटों का विस्तार कर श्रद्धालुओं की भीड़ को संतुलित किया गया है। सुरक्षा के लिए दस हजार से अधिक पुलिस व अर्द्धसैनिक बल तैनात हैं। टेंट सिटी मॉडल के तहत आवास, सात पॉन्टून पुल, सैकड़ों किलोमीटर के मार्ग, हेल्पडेस्क और रंग-कोडेड संकेत लगाए गए हैं। विशेष ट्रेनें, चिकित्सा शिविर, स्वच्छता और यातायात नियंत्रण के जरिए यह मेला एक सुव्यवस्थित आध्यात्मिक उत्सव का रूप ले रहा है।

