शिवहर जिले में नए साल की शुरुआत होते ही स्थानीय निवासियों ने जिले में महिला डिग्री कॉलेज की स्थापना की मांग को जोर-शोर से उठाना शुरू कर दिया है। जिले की महिलाओं के लिए उच्च शिक्षा की कमी को सबसे बड़ी शैक्षणिक बाधा बताते हुए सामाजिक कार्यकर्ता, अभिभावक और छात्र संगठनों ने इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में पहला कदम बताया है। उनका स्पष्ट कहना है कि बिना उच्च शिक्षा के महिला सशक्तिकरण का सपना अधूरा ही रहेगा।
शिवहर जिला, जो सीमांचल क्षेत्र में स्थित है और मुख्य रूप से कृषि आधारित अर्थव्यवस्था पर निर्भर है, लंबे समय से उच्च शिक्षा के मामले में पिछड़ा रहा है। जिले में मात्र एक डिग्री कॉलेज (शिवहर डिग्री कॉलेज) मौजूद है, जो पुरुष बहुल है और महिलाओं के लिए पर्याप्त सुविधाएं प्रदान नहीं करता। नतीजतन, स्थानीय लड़कियां उच्च शिक्षा के लिए सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर या दरभंगा जैसे दूरस्थ जिलों पर निर्भर हैं। यात्रा की दूरी, असुरक्षित परिवहन और आर्थिक बोझ के कारण सैकड़ों प्रतिभावान छात्राएं कॉलेज छोड़ने को मजबूर हो जाती हैं।
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता रानी देवी ने “वॉइस ऑफ बिहार न्यूज़” से बातचीत में कहा, “शिवहर में लड़कियों की साक्षरता दर 60% से भी कम है। बिना महिला डिग्री कॉलेज के हम उच्च शिक्षा कैसे सुनिश्चित करेंगे? यह न केवल शिक्षा का मुद्दा है, बल्कि महिला सशक्तिकरण का आधार भी है। सरकार को तत्काल इसकी स्वीकृति देनी चाहिए।” इसी तरह, छात्र संगठन ‘यूथ फॉर चेंज’ के अध्यक्ष मोहन कुमार ने बताया कि जिले में पिछले दो वर्षों में 500 से अधिक लड़कियां उच्च शिक्षा के अभाव में घर लौट चुकी हैं।
यह मांग नई नहीं है। 2024 में भी जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठा। नए साल पर आयोजित एक जागरूकता सभा में सैकड़ों लोगों ने भाग लिया और जिलाधिकारी को एक संयुक्त ज्ञापन सौंपा गया। इसमें कॉलेज के लिए 20 एकड़ भूमि चिह्नित करने, राज्य सरकार से फंडिंग और केंद्र की ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ योजना से जोड़ने की मांग की गई है।
शिक्षा विशेषज्ञ डॉ. सुनीता सिंह का कहना है कि महिला डिग्री कॉलेज न केवल स्नातक स्तर की पढ़ाई उपलब्ध कराएगा, बल्कि व्यावसायिक कोर्स जैसे बीएड, बीएससी और कंप्यूटर एप्लीकेशन भी शुरू कर सकता है। इससे जिले की बेरोजगारी दर, जो 15% से ऊपर है, पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा। बिहार सरकार की ‘हर घर एक स्कूल’ और उच्च शिक्षा नीति के तहत यह मांग सही दिशा में है।
जिलाधिकारी शिवहर ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “मांग को गंभीरता से लिया जा रहा है। उच्च शिक्षा विभाग से बात चल रही है और जल्द ही सकारात्मक खबर आने की उम्मीद है।” अब सवाल यह है कि क्या शिवहर की बेटियां इस बार अपनी मांग पूरी होते देख पाएंगी?

