सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज, सीतामढ़ी में इंजीनियरिंग की फाइनल ईयर की छात्रा मेधा पाराशर की मौ/त के बाद कॉलेज परिसर में तनावपूर्ण हालात कायम हो गया। शनिवार को दूसरे दिन भी बड़ी संख्या में छात्र कॉलेज प्रशासन, विशेषकर प्राचार्य के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर धरने पर बैठे रहे।
छात्रों ने बताया कि 23 जनवरी को मेधा पाराशर की अचानक तबीयत बिगड़ गई थी। वह कॉलेज के छात्रावास में रह रही थी। आरोप है कि उसकी हालत गंभीर होने के बावजूद कॉलेज प्रशासन ने तत्काल उसे अस्पताल नहीं पहुंचाया। छात्रों का कहना है कि जब मेधा की स्थिति और बिगड़ी और उसे प्राचार्य डॉ. सुशील कुमार की कार से अस्पताल ले जाया जा रहा था, तब रास्ते में यह कह कर वाहन से उतार दिया गया कि कार गंदी हो जाएगी।
इधर, प्राचार्य ने कहा कि मौके पर मौजूद चालक उनकी बड़ी गाड़ी चलाने में असर्थन था। इसके कारण एक शिक्षक की कार मंगवाकर उसे अस्पताल भेजा गया है। उसमें कोई विशेष समय नहीं लगा। मामले की जानकारी कॉलेज के डायरेक्टर को दे दी गई है और सभी आरोपों की जांच की जा रही है। जांच में यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। – आनंद कुमार, सदर एसडीओ।
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने कॉलेज प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर नारेबाजी की। इस बीच लगभग तीन घंटे तक कॉलेज परिसर में हंगामे की स्थिति बनी रही। हालात बिगड़ते देख सदर एसडीओ के हस्तक्षेप और समझौता के बाद छात्रों का आक्रोश शांत हुआ। आंदोलन के कारण कॉलेज में प्रथम पाली की परीक्षा रद्द करनी पड़ी, जिसमें 16 में से मात्र 10 छात्र उपस्थित हुए थे। सदर एसडीओ और डुमरा थाना प्रभारी मुकेश कुमार सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और छात्रों को समझा-बुझाकर स्थिति को नियंत्रित किया। विधायक सुनील कुमार पिंटू भी मामले की जानकारी डीएम को दी।
छात्रा की तबीयत बिगड़ने की सूचना मिलते ही उसे अपनी गाड़ी से सदर अस्पताल भेजा था, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। छात्रों के हंगामे के कारण प्रथम पाली की परीक्षा रद्द की गई, जबकि द्वितीय पाली में 280 छात्र परीक्षा में शामिल हुए। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। – डॉ. सुशील कुमार, प्राचार्य, एसआईटी, सीतामढ़ी।
भागलपुर की रहने वाली थी मृतक
बताया जा रहा है कि मेधा पाराशर बिहार के भागलपुर जिले की रहने वाली थी और कॉलेज के हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रही थी. समय पर उचित इलाज नहीं मिलने से उसकी मौत हो गई. इस घटना ने पूरे छात्र समुदाय को झकझोर कर रख दिया है. धरने पर बैठे छात्र-छात्राएं कॉलेज प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि यह सिर्फ एक छात्रा की मौत नहीं, बल्कि कॉलेज में स्वास्थ्य सुविधाओं और प्रशासनिक संवेदनहीनता का मामला है. छात्रों ने चेतावनी दी है कि जब तक उन्हें न्याय का भरोसा नहीं मिलता, उनका आंदोलन जारी रहेगा.

